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नवजात शिशॠके नाà¤à¤¿ ठूंठ(अमà¥à¤¬à¤¿à¤²à¤¿à¤•ल कॉरà¥à¤¡ सà¥à¤Ÿà¤‚प) की देखà¤à¤¾à¤²
शिशॠकी मालिश
मालिश करवाता शिशà¥à¤¶à¤¿à¤¶à¥ की मालिश कैसे करें, यहां जानें।
शिशॠके जनà¥à¤® के बाद उसकी गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² में à¤à¤• चिमटी (कà¥à¤²à¥ˆà¤‚प) लगाकर नाल को नवजात शिशॠके पेट के पास से काट दिया जाता है। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में दरà¥à¤¦ नहीं होता। शिशॠके पेट पर नाल का जो 2 से 3 सें.मी. लंबा हिसà¥à¤¸à¤¾ जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ रह जाता है, वह ठूंठ(सà¥à¤Ÿà¤‚प) अपने आप सूखकर गिर जाता है। इस जगह का घाव ठीक होकर आपके शिशॠकी नाà¤à¤¿ बनता है।
आपको शिशॠकी गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² के ठूंठको साफ और इनफेकà¥à¤¶à¤¨ से दूर रखना होगा। इसकी देखà¤à¤¾à¤² के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दिठगठनिरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥‹à¤‚ का पालन करें। किसी à¤à¥€ तरह की दà¥à¤°à¥à¤—ंध, मवाद, खून आना, नाà¤à¤¿ के आसपास की तà¥à¤µà¤šà¤¾ लाल होना या वहां सूजन होना इनफेकà¥à¤¶à¤¨ के संकेत हो सकते हैं। इसे शिशॠके डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाया जाना चाहिà¤à¥¤
नाà¤à¤¿ ठूंठकà¥à¤¯à¤¾ होता है?
गरà¥à¤ में शिशà¥à¤“ं को पोषण और ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ अपरा (पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा) के जरिये मिलता है, जो कि मां के गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ की अंदरà¥à¤¨à¥€ दीवार से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ होती है। पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा, गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² (अंबिलिकल कॉरà¥à¤¡) के जरिये आपके शिशॠसे जà¥à¤¡à¤¼à¥€ होती है। गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² à¤à¤• नलिका जैसी होती है जो शिशॠके पेट से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ होती है।
​शिशॠके जनà¥à¤® के बाद, गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² को चिमटी (कà¥à¤²à¥‡à¤‚प) लगाकर नवजात शिशॠके शरीर के पास से काट दिया जाता है। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में दरà¥à¤¦ नहीं होता। इसे काटे जाने पर आप और आपके शिशॠदोनों को ही कोई अहसास नहीं होगा, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² में कोई नसें नहीं होती हैं।
नाल जहां से नवजात शिशॠके पेट से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ होती है, काटने के बाद वहां 2 से 3 सेंं.मी. लंबा नाà¤à¤¿ ठूंठरह जाà¤à¤—ा और इस पर पà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• की कà¥à¤²à¥ˆà¤‚प लगी होगी। जब तक यह सूखकर गिर नहीं जाता और घाव पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता, तब तक आपको इसे साफ और इनफेकà¥à¤¶à¤¨ से दूर रखना होगा।
मेरे नवजात शिशॠका नाà¤à¤¿ ठूंठटूटकर कब गिरेगा?
आपके शिशॠका ​नाà¤à¤¿ ठूंठअपने आप जनà¥à¤® के पांच से 10 दिनों के अंदर सूखकर गिर जाà¤à¤—ा। अगर इसे सूखा रखा जाà¤, तो आमतौर पर करीब à¤à¤• हफà¥à¤¤à¥‡ में यह हट जाता है।
जब ठूंठसूख रहा होता है, तो यह सखà¥à¤¤ और संकà¥à¤šà¤¿à¤¤ हो जाता है। ​इसकी दिखावट और रंगत पीले-हरे से à¤à¥‚री या काली हो जाती है।
यह बहà¥à¤¤ जरà¥à¤°à¥€ है कि आप नाà¤à¤¿ ठूंठको हटाने के लिठजलà¥à¤¦à¤¬à¤¾à¤œà¥€ न करें। ठूंठको हिलाà¤-डà¥à¤²à¤¾à¤à¤‚ नहीं, इसे काटे नहीं या इसे खींचे नहीं, फिर चाहे यह केवल à¤à¤• धागे से ही लटकी कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ न हो। नाà¤à¤¿ ठूंठको अपने आप सूखने दें और यह सूखकर अपने आप टूट जाà¤à¤—ी।
शिशॠके ठूंठकी देखà¤à¤¾à¤² कैसे की जाà¤?
शिशॠके नाà¤à¤¿ के ठूंठको संकà¥à¤°à¤®à¤£ से बचाने के लिठउसे सà¥à¤µà¤šà¥à¤› और सूखा रखने की आवशà¥à¤¯à¤•ता है। यहां कà¥à¤› सà¥à¤à¤¾à¤µ दिठगठहैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आपको धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखना चाहिà¤, जैसे कि:
शिशॠकी नैपी (लंगोट) बदलने, उसे नहलाने या उसके नाà¤à¤¿ ठूंठको छूने से पहले और बाद में अपने हाथ हमेशा धोà¤à¤‚।
अपने शिशॠको ढीले और हलà¥à¤•े कपड़े पहनाà¤à¤‚ ताकि नाà¤à¤¿ ठूंठतक हवा पहà¥à¤‚चती रहे। जब ​तक नाà¤à¤¿ ठूंठटूटकर गिर नहीं जाती और पूरी तरह घाव à¤à¤° नहीं जाता, तब तक शिशॠको बॉडीसूट या वनजी सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² वाले कपड़े न पहनाà¤à¤‚।
कà¥à¤› डॉकà¥à¤Ÿà¤° सलाह देते हैं कि जब तक नाà¤à¤¿ ठूंठटूटकर गिर नहीं जाता, तब तक शिशॠको केवल सà¥à¤ªà¤‚ज सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ करवाना चाहिà¤à¥¤ आप शिशॠको नहला à¤à¥€ सकती हैं। नहलाने के दौरान ठूंठका गीला होना चिंता की बात नहीं है। इससे घाव à¤à¤°à¤¨à¥‡ में रà¥à¤•ावट या संकà¥à¤°à¤®à¤£ पैदा होने का डर नहीं होता, बशरà¥à¤¤à¥‡ आप बाद में इसे मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤®, साफ तौलिये से थपथपाकर पौंछ दें।
नाà¤à¤¿ ठूंठपर हवा लगती रहे और लंगोट या डायपर से रगड़ न लगे, इसके लिठशिशॠकी नैपी या डायपर की कमर पटà¥à¤Ÿà¥€ को नीचे की तरफ मोड़ दें। इस तरीके से ठूंठनैपी से बाहर रहेगा और नैपी की रगड़ से ठूंठमें असहजता à¤à¥€ नहीं होगी। नवजात शिशà¥à¤“ं की कà¥à¤› नैपी या डायपर में ठूंठको खà¥à¤²à¤¾ रखने के लिठआगे की तरफ थोड़ा खà¥à¤²à¤¾ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ à¤à¥€ दिया होता है। इससे ठूंठमें हवा लगती रहती है और इससे पेशाब से à¤à¥€ बचाव होता है। यदि नाà¤à¤¿à¤ ूंठमें शिशॠका मल या मूतà¥à¤° लग à¤à¥€ जाठतो इसे पानी और सौमà¥à¤¯ लिकà¥à¤µà¤¿à¤¡ बेबी कà¥à¤²à¥€à¤‚जर से सावधानीपूरà¥à¤µà¤• साफ कर दें। इसके बाद ठूंठको थपथपाते हà¥à¤ पौंछ दें।
जब तक ठूंठटूटकर नहीं गिरता, तब तक पà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• की कà¥à¤²à¤¿à¤ª उस पर लगी रहती है। इसलिठशिशॠको पौंछते हà¥à¤, कपड़े पहनाते हà¥à¤ या नैपी बदलते हà¥à¤ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि वह कà¥à¤²à¤¿à¤ª खिंचे ना। अगर तेजी से कà¥à¤²à¥ˆà¤‚प खिंच जाठतो शिशॠको चोट लग सकती है।
कà¥à¤› डॉकà¥à¤Ÿà¤° नाà¤à¤¿ ठूंठको à¤à¤²à¥à¤•ोहॉल सà¥à¤µà¥‰à¤¬ से साफ करने की सलाह देते हैं, वहीं कà¥à¤› अनà¥à¤¯ डॉकà¥à¤Ÿà¤° ठूंठपर रोजाना à¤à¤‚टिसेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤• सोलà¥à¤¯à¥‚शन या पाउडर या फिर ऑइंटमेंट लगाने की सलाह देते हैं। कà¥à¤› डॉकà¥à¤Ÿà¤° यह मानते हैं कि शिशॠके नाà¤à¤¿ ठूंठको साफ रखने के लिठकेवल सादा पानी ही परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ है। सबसे जरà¥à¤°à¥€ यह है कि गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² के ठूंठको साफ और सूखा रखना चाहिà¤, ताकि संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ से बचाव हो सके। आपके शिशॠकी नाà¤à¤¿ ठूंठसाफ करने का सही तरीका कà¥à¤¯à¤¾ रहेगा, इस बारे में डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें।
यदि आपके शिशॠका जनà¥à¤® समय से पहले हà¥à¤† है (पà¥à¤°à¥€à¤®à¥ˆà¤šà¥à¤¯à¥‹à¤°) या जनà¥à¤® के बाद उसे विशेष देखà¤à¤¾à¤² की जरà¥à¤°à¤¤ है, तो नवजात आईसीयू में शिशॠके नाà¤à¤¿à¤ ूंठकी देखà¤à¤¾à¤² में डॉकà¥à¤Ÿà¤° और नरà¥à¤¸ आपकी मदद करेंगे।
जब आप अपने पà¥à¤°à¥€à¤®à¥ˆà¤šà¥à¤¯à¥‹à¤° शिशॠको असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² से घर लाते हैं और तब à¤à¥€ उसकी नाà¤à¤¿ ठूंठजà¥à¤¡à¤¼à¥€ हà¥à¤ˆ हो, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपको इसकी साफ-सफाई और देखà¤à¤¾à¤² के तरीके के बारे में बताà¤à¤‚गे। आपको शायद शिशॠको सà¥à¤ªà¤‚ज बाथ करवाने की ही सलाह दी जाà¤à¤—ी, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤°à¥à¤® शिशॠको पूरà¥à¤£ अवधि पर जनà¥à¤®à¥‡ सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ शिशॠकी तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में इनफेकà¥à¤¶à¤¨ का खतरा जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो सकता है।
कà¥à¤¯à¤¾ गरà¥à¤® और आरà¥à¤¦à¥à¤° मौसम में नाà¤à¤¿ ठूंठकी और अधिक देखरेख करनी चाहिà¤?
चाहे कोई à¤à¥€ मौसम हो, जरà¥à¤°à¥€ है कि शिशॠके नाà¤à¤¿ ठूंठको साफ और सूखा रखा जाठऔर इनफेकà¥à¤¶à¤¨ के संकतों पर नजर रखी जाà¤à¥¤
फिर à¤à¥€, आरà¥à¤¦à¥à¤° मौसम में खासतौर पर मानसून के ​दिनों में कई बार कà¥à¤› पेरशानियां आ सकती हैं। जब आरà¥à¤¦à¥à¤°à¤¤à¤¾ बढती है तो आप पाà¤à¤‚गी कि पसीने को वाषà¥à¤ªà¤¿à¤¤ होने में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय लगता है, जिससे तà¥à¤µà¤šà¤¾ लंबे समय तक नम रहती है। आरà¥à¤¦à¥à¤° और उमसà¤à¤°à¥‡ मौसम में कीटाणà¥à¤“ं और बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को à¤à¥€ बढ़ावा मिलता है।
अपने शिशॠको ठंडे और आरामदायक माहौल में रखें जहां हवा की आवाजाही बनी रहे। यदि आप à¤à¤¸à¥€ या कूलर का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर रहे हैं तो शिशॠपर सीधी ठंडी हवा न लगने दें।
यदि आपके कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में बार-बार बिजली कटौती रहती है, तो शिशॠको सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ और आरामदेह रखने के उपाय अजमाà¤à¤‚।
मालिश के दौरान शिशॠके नाà¤à¤¿ ठूंठकी सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ कैसे करनी होगी?
यदि गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² ठूंठके हटने और घाव के ठीक होने से पहले ही आप शिशॠकी मालिश शà¥à¤°à¥ करना चाहें, तो बेहतर है कि आप उसके पेट पर मालिश न करें। उसकी हलà¥à¤•े हाथ से मालिश करें और धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि कà¥à¤²à¥ˆà¤‚प पर हाथ न लगे।
पारंपरिक तौर पर जापा बाई या मालिशवाली नाà¤à¤¿ ठूंठऔर इसके आसपास तेल से मालिश करती हैं। कà¥à¤› तो खà¥à¤¦ तैयार किया गया हरà¥à¤¬à¤² पाउडर या तेल इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करती हैं ताकि नाà¤à¤¿ ठूंठजलà¥à¤¦à¥€ ठीक हो सके। बहरहाल, तेल और पाउडर लगाने से तà¥à¤µà¤šà¤¾ की सिलवटों में नमी और धूल फंस सकती है, जिससे ठूंठमें जलन या इनफेकà¥à¤¶à¤¨ हो सकता है। साथ ही, कà¥à¤› पाउडर या तेल में à¤à¤¸à¥‡ ततà¥à¤µ à¤à¥€ हो सकते हैं जो शिशà¥à¤“ं के लिठसà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ नहीं होते।
शिशॠको नहलाने के बाद उसकी नाà¤à¤¿ में पिसी हà¥à¤ˆ हींग या अजवायन डालने की à¤à¥€ à¤à¤• आम पà¥à¤°à¤¥à¤¾ है। माना जाता है कि इससे पाचन संबंधी परेशानियों से राहत मिलती है और उदरशूल (कॉलिक) से बचाव होता है। हालांकि, इनका इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² पीढ़ियों से चला आ रहा है और यह à¤à¤• लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ पà¥à¤°à¤¥à¤¾ है, मगर कहा नहीं जा सकता कि ये कितना पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ हैं।
बेहतर है कि जब तक शिशॠका गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² ठूंठटूटकर गिरता नहीं और घाव पूरी तरह à¤à¤° नहीं जाता, तब तक इस तरह के घरेलू उपाय न आजमाà¤à¤‚। आपके शिशॠका नाà¤à¤¿ ठूंठकाफी संवेदनशील होता है। इसे किसी चीज से ढकना या तेल या हरà¥à¤¬à¤² मिशà¥à¤°à¤£ लगाने से इसे ठीक होने में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय लग सकता है और गंà¤à¥€à¤° इनफेकà¥à¤¶à¤¨ à¤à¥€ हो सकता है।
घाव के à¤à¤° जाने के बाद à¤à¥€ बेहतर है कि हरà¥à¤¬à¤² मिशà¥à¤°à¤£ आदि को नाà¤à¤¿ के बाहर की तरफ ही लगाया जाà¤, अंदर न लगाà¤à¤‚। आप शिशॠकी नाà¤à¤¿ पर रà¥à¤ˆ का फाहा रखकर इसके चारों तरफ यह मिशà¥à¤°à¤£ लगा सकती हैं। इस तरह यह नाà¤à¤¿ के अंदर नहीं जाà¤à¤—ा।
कैसे पता चलेगा कि शिशॠके नाà¤à¤¿ ठूंठमें इनफेकà¥à¤¶à¤¨ हो गया है?
जब नाà¤à¤¿ ठूंठठीक हो रहा होता है, तो इसके आसपास थोड़ा खून दिखाई देना सामानà¥à¤¯ है। यह इसके संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ होने का संकेत नहीं है। हालांकि, यदि आपके शिशॠको निमà¥à¤¨à¤¾à¤‚कित लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ हों तो हो सकता है ठूंठमें इनफेकà¥à¤¶à¤¨ हो गया हो:
नाà¤à¤¿ ठूंठको या इसके आसपास की तà¥à¤µà¤šà¤¾ को छूने पर शिशॠरोने लगता है।
उसकी नाà¤à¤¿ और आसपास की जगह लाल है या सूजी हà¥à¤ˆ है।
ठूंठमें सूजन है, दà¥à¤°à¥à¤—ंध आ रही है या सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤µ निकल रहा है।
आपके शिशॠको बà¥à¤–ार है।
आपका शिशॠसà¥à¤¸à¥à¤¤ सा लगता है, दूध पीने में उसकी रà¥à¤šà¤¿ कम हो गई है या गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² के आसपास की जगह लाल है और शिशॠकी तबियत ठीक न लग रही हो।
यदि आपके शिशॠको इनमें से कोई à¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ हों तो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करें। शिशॠके डॉकà¥à¤Ÿà¤° उसकी नाà¤à¤¿ ठूंठकी जांच करके देखना चाहेंगे कि कहीं यह संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ तो नहीं है। अधिकांश मामलों में किसी उपचार की जरà¥à¤°à¤¤ नहीं होती। हालांकि, शिशॠके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को देखते हà¥à¤ डॉकà¥à¤Ÿà¤° निमà¥à¤¨à¤¾à¤‚कित सलाह दे सकते हैं:
ठूंठको साफ करना, जैसे आप पहले कर रही थी, इसे अचà¥à¤›à¥€ तरह सूखने देना और दिन में कà¥à¤› समय इसे बिना ढके खà¥à¤²à¤¾ रखना।
हर बार ठूंठसाफ करने के बाद इस पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बताई गई à¤à¤‚टिबैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² या à¤à¤‚टिफंगल ऑइंटमेंट लगाà¤à¤‚।
यदि शिशॠकी ठूंठमें गंà¤à¥€à¤° संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो, तो उचित इलाज के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° उसे असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ कर सकते हैं।
मेरे शिशॠकी नाà¤à¤¿ को पूरी तरह ठीक होने में कितना समय लगेगा?
ठूंठके टूटकर गिरने के बाद उस जगह छोटा घाव रहेगा। नाà¤à¤¿ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° को पूरी तरह ठीक होने में सात और 10 दिन के बीच का समय लग सकता है। यह घाव ठीक होने के बाद आपके शिशॠकी नाà¤à¤¿ बनती है।
आपको शिशॠकी नैपी की कमरपटà¥à¤Ÿà¥€ में थोड़ा खून लगा दिख सकता है। यह à¤à¤•दम सामानà¥à¤¯ है। हालांकि, यदि पौंछने के बाद à¤à¥€ खून आना बंद न हो तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह लें। य​ह रकà¥à¤¤ संबंधी विकार का संकेत हो सकता है।
अगर शिशॠका नाà¤à¤¿ ठूंठठीक न हो रहा हो तो कà¥à¤¯à¤¾ करना चाहिà¤?
कई बार, नाà¤à¤¿ का घाव ठीक होने में 10 दिन से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ का समय लग सकता है। हालांकि, अगर आपको नाà¤à¤¿ ठूंठके कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में नरम गà¥à¤²à¤¾à¤¬à¥€ या लाल गांठसी दिखाई दें, जिसमें से साफ या पीला तरल निकल रहा हो या नमीयà¥à¤•à¥à¤¤ हो, तो हो सकता है आपके शिशॠको अमà¥à¤¬à¤¿à¤²à¤¿à¤•ल गà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥à¤²à¥‹à¤®à¤¾ हो। घाव à¤à¤°à¤¨à¥‡ क बाद बने उतà¥à¤¤à¤•ों (सà¥à¤•ार टिशà¥à¤¯à¥‚) की अतà¥à¤¯à¤¾à¤§à¤¿à¤• बढ़त को गà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥à¤²à¥‹à¤®à¤¾ कहा जाता है।
अमà¥à¤¬à¤¿à¤²à¤¿à¤•ल गà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥à¤²à¥‹à¤®à¤¾ गंà¤à¥€à¤° नहीं होता और आमतौर पर इसका उपचार आसान होता है। यदि आपको लगे कि आपके शिशॠके साथ यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें। वे आपके शिशॠके लिठबेहतर उपचार बता सकेंगे।
यदि इलाज के बाद à¤à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में सà¥à¤§à¤¾à¤° न आठतो डॉकà¥à¤Ÿà¤° कॉटराइजेशन की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ अपनाà¤à¤‚गे। इसमें सिलà¥à¤µà¤° नाइटà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ नामक रसायन से उतà¥à¤¤à¤•ों को बंद किया जाता है।
यह सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ में काफी à¤à¤¯à¤¾à¤µà¤¹ लग सकता है, मगर यह à¤à¤• साधारण पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है। आपके शिशॠको इसका कोई अहसास नहीं होगा कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² में कोई नसें नहीं होती हैं।
मेरे शिशॠकी नाà¤à¤¿ का आकार कà¥à¤› अजीब सा है। कà¥à¤¯à¤¾ इसे ठीक किया जा सकता है?
गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² का ठूंठजब टूटकर गिर जाता है तो जो घाव बचता है, वह नाà¤à¤¿ बनता है। आपके शिशॠकी नाà¤à¤¿ का आकार वासà¥à¤¤à¤µ में इस बात पर निरà¥à¤à¤° करता है कि गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² उसके पेट से किस तरह जà¥à¤¡à¤¼à¥€ थी। इसलिठइसमें बदलाव के लिठआप कà¥à¤› नहीं कर सकतीं और न ही करना चाहिà¤à¥¤
आपने शायद सà¥à¤¨à¤¾ हो ​कि शिशॠके नाà¤à¤¿ ठूंठपर सिकà¥à¤•ा चिपका देने से नाà¤à¤¿ को अंदर की तरफ दबने में मदद मिलती है और वह बाहर नहीं निकलती। मगर, सचà¥à¤šà¤¾à¤ˆ यह है कि दबाव डालने से à¤à¥€ नाà¤à¤¿ के आकार में बदलाव नहीं आता है। साथ ही, यदि सिकà¥à¤•ा हटकर गिर जाठऔर शिशॠइसे मà¥à¤‚ह में ले ले तो गला अवरà¥à¤¦à¥à¤§ होने का खतरा रहता है।
कà¥à¤¯à¤¾ शिशॠकी नाà¤à¤¿ में तेल की बूंदें डालना सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है?
नहीं, नवजात की नाà¤à¤¿ में तेल डालना सही नहीं है। जब तक कि नवजात का नाà¤à¤¿ ठूंठटूटकर गिर नहीं जाता, तब तक इसे सूखा ही रखना चाहिà¤à¥¤ नाà¤à¤¿ में तेल डालने से उसमें धूल-मिटà¥à¤Ÿà¥€ और मैल जमा हो सकता है, जिससे इनफेकà¥à¤¶à¤¨ का खतरा रहता है। शिशॠके नाà¤à¤¿ ठूंठमें संकà¥à¤°à¤®à¤£ के संकेतों पर नजर रखें।
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